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हिंदी प्रकोष्ठ

हिंदी विश्व की एक प्रमुख भाषा है एवं भारत की राजभाषा है।हिंदी संवैधानिक रूप से भारत की प्रथम राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है।भारत में हिंदी, विभिन्न भारतीय राज्यों की १४ आधिकारिक भाषाओं और क्षेत्र की बोलियों का उपयोग करने वाले लगभग १ अरब लोगों में से अधिकांश की दूसरी भाषा है।

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हिंदी प्रकोष्ठ

हिन्दी शब्द का सम्बंध संस्कृत शब्द सिंधु से माना जाता है। 'सिंधु' सिंध नदी को कहते थे और उसी आधार पर उसके आस-पास की भूमि को सिन्धु कहने लगे। हिन्दी को देवनागरी लिपि में लिखा जाता है। इसे नागरी नाम से भी पुकारा जाता है। देवनागरी में ११ स्वर और ३३ व्यंजन हैं और अनुस्वार, अनुनासिक एवं विसर्ग होता है तथा इसे बायें से दाईं ओर लिखा जाता है।

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हिंदी प्रकोष्ठ

हिन्‍दी भाषा का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना गया है। हिन्‍दी भाषा व साहित्‍य के जानकार अपभ्रंश की अंतिम अवस्‍था 'अवहट्ठ' से हिन्‍दी का उद्भव स्‍वीकार करते हैं। चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने इसी अवहट्ठ को 'पुरानी हिन्दी' नाम दिया।हिन्दी हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार परिवार के अन्दर आती है। ये हिन्द ईरानी शाखा की हिन्द आर्य उपशाखा के अन्तर्गत वर्गीकृत है। हिन्द-आर्य भाषाएँ वो भाषाएँ हैं जो संस्कृत से उत्पन्न हुई हैं। उर्दू, कश्मीरी, बंगाली, उड़िया, पंजाबी, रोमानी, मराठी नेपाली जैसी भाषाएँ भी हिन्द-आर्य भाषाएँ हैं।

राजभाषा विभाग ई-बुक

राजभाषा, किसी राज्य या देश की घोषित भाषा होती है जो कि सभी राजकीय प्रयोजनों में प्रयोग होती है। उदाहरणतः भारत की राजभाषा हिन्दी है। केंद्रीय स्तर पर दूसरी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है।

वार्षिक आयोजन

यह श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय हिंदी प्रकोष्ठ का आधिकारिक वार्षिक कार्यक्रम है।

राजभाषा पत्रिकाएं व लेख

राजभाषा भारती संघ की राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार तथा प्रोत्साहन को समर्पित त्रैमासिक पत्रिका है,जिसे राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय द्वारा प्रकाशित किया जाता है ।

हिंदी शब्दकोश

शब्दकोश शब्दकोश (अन्य वर्तनी:शब्दकोष) एक बडी सूची या ऐसा ग्रंथ जिसमें शब्दों की वर्तनी, उनकी व्युत्पत्ति, व्याकरणनिर्देश, अर्थ, परिभाषा, प्रयोग और पदार्थ आदि का सन्निवेश हो।


स्थापना

23/11/2015 को आयोजित अपनी 24 वीं बैठक में कार्यकारी परिषद द्वारा अनुमोदित के रूप में, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (U.G.C) के निर्देशों के अनुरूप श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय हिंदी प्रकोष्ठ की स्थापना सभी संबंधितों की जानकारी के लिए यहाँ दी गई है।

विस्तृत जानकारी

उद्देश्य

प्रोत्साहन और प्रोत्साहन के साथ केंद्र सरकार के कार्यों में हिंदी के प्रगतिशील कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।हम हिंदी को सर्वव्यापी भाषा बनाना चाहते हैं।

लक्ष्य

हिंदी में अवकाश पढ़ने अनुभाग के लिए महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध हिंदी पुस्तकों साहित्य की खरीद करें और हिंदी पत्रिकाओं की सदस्यता लें।समाचार पत्र / पत्रिका जैसे संस्थागत प्रकाशनों में हिंदी लेखों का प्रकाशन।

संकल्पना

हिंदी में संगोष्ठी / बोलचाल / लोकप्रिय व्याख्यान आयोजित करने के लिए। हिंदी में अनुवाद, ई-कंटेंट डिजाइनिंग, संस्कृति कार्यक्रम (जैसे: - नुक्कड़ नाटक, रंगमंच आदि) को प्रोत्साहित करें।

मुख्य बिंदु

खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है, जीवन नाम है, आगे बढ़ते रहने की लगन का।:- मुंशी प्रेमचंद

हिंदी पखवाड़ा 2019

भारत सरकार के सभी कार्यालयों, उपक्रमों, उद्यमों, संस्थाओं में हिंदी पखवाड़ा हर वर्ष १४ सितंबर से २८ सितंबर अथवा १ सितंबर से १४ सितंबर तक मनाया जाता है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हिंदी पखवाड़ा का आयोजन बड़े धूम धाम से मनाया गया। इस वर्ष श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय में आयोजित हिंदी पखवाड़ा के अन्त्रगत कराये गए कार्यक्रम एवं प्रतिस्पर्धा के परिणाम नीचे अंकित हैं।

परिणाम

हिंदी दिवस

14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर वर्ष 1953 से पूरे भारत में 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस

अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाता है। यह दिन वर्ष का सबसे लम्बा दिन होता है और योग भी मनुष्य को दीर्घ जीवन प्रदान करता है।योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है; मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है; विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है।

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sample

समिति

अतीत पर ध्यान केन्द्रित मत करो, भविष्य का सपना भी मत देखो, वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करो । :-गौतम बुद्ध
  • डॉ.अनिल तिवारी

    नोडल अधिकारी,हिंदी प्रकोष्ठ

  • प्रो.आर.के. सिन्हा

    कुलपति,श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय

  • श्री सत्य पाल मलिक

    कुलाधिपति,श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय

  • डॉ.युगल खजुरिया

    छात्र कल्याण विभाग के अध्यक्ष

  • डॉ.अमिताभ विक्रम द्विवेदी

    उपाध्यक्ष,हिंदी प्रकोष्ठ

user

“अपने दोष हम देखना नहीं चाहते, दूसरों के देखने में हमें मजा आता है बहुत सारे दुख तो इसी आदत से पैदा होते हैं! ”

- महात्मा गांधी

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“किसी को हरा देना बेहद आसान है, लेकिन किसी को जीतना बेहद मुश्किल है।”

- डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

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“जो व्यक्ति शक्ति न होते हुए भी मन से हार नहीं मानता, उसको दुनिया की कोई भी ताकत हरा नहीं सकती है।”

- चाणक्य

हमारी पत्रिका

तुम्हें कोई पढ़ा नहीं सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुमको सब कुछ खुद अंदर से सीखना हैं। आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नही हैं। -स्वामी विवेकानंद

ज्ञानधारा प्रथम संस्करण

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भाषा का विकास साहित्य से हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए हिंदी पत्रिका का विमोचन हुआ हैं।ज्ञानधारा शीर्षक इतना सरल सटीक और रोचक हैं कि मन उत्सुकता से भर जाता हैं।इस पत्रिका में कविता,रोचक कहानी एवं विभिन्न कृतियों का संयोजन हैं।छात्र अपने द्वारा लिखी अनोखी रचनाओं को ज्ञानधारा के अगले संस्करण में अंकित करा सकते हैं।

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ज्ञानधारा द्वितीय संस्करण

हिंदी प्रकोष्ठ

भाषा का विकास साहित्य से हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए हिंदी पत्रिका का विमोचन हुआ हैं।ज्ञानधारा शीर्षक इतना सरल सटीक और रोचक हैं कि मन उत्सुकता से भर जाता हैं।ज्ञानधारा श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय की अर्धमासिक पत्रिका हैं।इस पत्रिका में कविता,रोचक कहानी एवं विभिन्न कृतियों का संयोजन हैं।छात्र अपने द्वारा लिखी अनोखी रचनाओं को ज्ञानधारा के अगले संस्करण में अंकित करा सकते हैं।

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ज्ञानधारा के लिए चयनित कविता

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भाषा का विकास साहित्य से हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए हिंदी पत्रिका का विमोचन हुआ हैं।ज्ञानधारा शीर्षक इतना सरल सटीक और रोचक हैं कि मन उत्सुकता से भर जाता हैं।ज्ञानधारा श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय की अर्धमासिक पत्रिका हैं।इस पत्रिका में कविता,रोचक कहानी एवं विभिन्न कृतियों का संयोजन हैं।छात्र अपने द्वारा लिखी अनोखी रचनाओं को ज्ञानधारा के अगले संस्करण में अंकित करा सकते हैं।

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ज्ञानधारा के लिए चयनित कविता

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भाषा का विकास साहित्य से हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए हिंदी पत्रिका का विमोचन हुआ हैं।ज्ञानधारा शीर्षक इतना सरल सटीक और रोचक हैं कि मन उत्सुकता से भर जाता हैं।ज्ञानधारा श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय की अर्धमासिक पत्रिका हैं।इस पत्रिका में कविता,रोचक कहानी एवं विभिन्न कृतियों का संयोजन हैं।छात्र अपने द्वारा लिखी अनोखी रचनाओं को ज्ञानधारा के अगले संस्करण में अंकित करा सकते हैं।

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